कर्नाटक चुनाव में किन्नरों ने किया पहली बार मतदान

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ANJALI SINGH
बेंगलूरु। पंद्रहवीं विधानसभा के लिए हो रहे चुनावों में आज यहां पहली बार तीसरे जेंडर के रूप में उच्चतम न्यायालय द्वारा पहचान दिए गए किन्नरों ने अपने मताधिकार का उपयोग किया। मंगलूरु में अपने मताधिकार का उपयोग करने बूथ सेंटरों तक पहुंचे किन्नरों के चेहरे पर इसके लिए आज विशेष खुशी झलक रही थी।
मिलग्रेस स्कूल में मतदान करने एक साथ 20 से अधिक पहुंचे किन्नरों ने इसके लिए उच्चतम न्यायालय का आभार भी जताया और वोट का उपयोग करते हुए अपनी ओर से खुशी जाहिर की। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2014 को 15 अप्रैल के दिन अपना एक निर्णायक फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि किन्नरों या ट्रांसजेंडर्स को तीसरे लिंग के रूप में पहचाना जाएगा। जबकि इससे पहले उन्हें मजबूरी में अपना जेंडर पुरुष या महिला बताना पड़ता था।
इसी के साथ कोर्ट ने ट्रांसजेंडर्स को सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर तबके के रूप में पहचान करने के लिए भी कहा था। इस निर्णय में यह भी कहा गया कि शिक्षण संस्थानों में दाखिला लेते वक्त या नौकरी देते वक्त ट्रांसजेंडर्स की पहचान तीसरे लिंग के रूप में की जाए साथ में यह भी जोड़ा था कि किन्नरों या तीसरे लिंग की पहचान के लिए कोई कानून न होने की वजह से उनके साथ शिक्षा या जॉब के क्षेत्र में भेदभाव नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तीसरे लिंग को ओबीसी माना जाएगा और इन्हें शिक्षा और नौकरी में ओबीसी के तौर पर रिजर्वेशन मिलेगा।

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