कभी पिता ने कहा था कि इंजीनियरिंग लड़कियों के लिए ठीक नहीं, अब बेटी को गूगल में मिला 1 करोड़ का पैकेज

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chandra bhushan tiwari

नई दिल्ली। जमाना बदल रहा है। लड़कियां हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं। कोई ऐसा क्षेत्र नहीं बचा है, जहां इनकी प्रतिभा की गूंज न हो। बिहार की एक बेटी मधुमिता को गूगल ने एक करोड़ से अधिक की सैलरी पर सेवा का अवसर दिया है। रोचक बात यह है कि कभी मधुमिता के पिता ने बेटी के इंजीनियरिंग फील्ड में जाने के लिए तैयार नहीं थे। उनका कहना था कि इंजीनियरिंग का क्षेत्र लड़कियों के लिए ठीक नहीं है। हालांकि बेटी की रुचि को देखते हुए उन्होंने मधुमिता को इंजीनियरिंग करने की अनुमति दे दी। मधुमिता ने गूगल के स्विट्ज़रलैंड स्थित ऑफिस में टेक्निकल सोल्युशन इंजीनियर के तौर पर ज्वॉइन किया है। मधुमिता ने जयपुर के आर्या कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नॉलॉजी से कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की है। बारहवीं तक की पढ़ाई उन्होंने पटना के डीएवी, वाल्मी स्कूल से की।

अब्दुल कलाम से मिली प्रेरणा

अपने परिवार या कहें कि खानदान से विदेश जाने वाली वह पहली शख्स हैं. वह इसी साल फरवरी में पहली बार अमरीका गयीं थीं। मधुमिता भारत के पूर्व राष्ट्रपति और मशहूर वैज्ञनिक एपीजे अब्दुल कलाम से प्रभावित और प्रेरित हैं। उन्हीं के विचारों की प्रेरणा से उसे जिंदगी में यह मुकाम हासिल करने में सफलता मिली। वह कलाम की किताबें व बायोग्राफी अक्सर पढ़ा करती थी।

आईएएस बनना चाहती थीं मधुमिता

स्कूल की पढ़ाई के दिनों में मधुमिता को मैथ और फ़िजिक्स ज़्यादा पसंद था. साथ ही डिबेट कंपीटीशंस में भी वह बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेती थीं. शुरुआत में मधुमिता आईएएस बनना चाहती थीं। पर बाद में उन्होंने इंजीनियरिंग को अपना करियर बनाया। 2010 में उन्होंने बारहवीं की कक्षा की परीक्षा पास करने के साथ साथ इंजीनियरिंग में दाखिला भी ले लिया। बारहवीं कक्षा में मधुमिता को करीब 86 फीसदी अंक मिले थे। देश के अच्छे कॉलेजों में दाखिले के हिसाब से इतने अंक औसत माने जाते हैं. ऐसे में उनकी सफलता इस बात को एक बार फिर ये साबित करती है कि बोर्ड में बहुत अच्छे नंबर नहीं आने से भी सफलता के रास्ते बंद नहीं हो जाते हैं।

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