हसरतें रही अधूरी,खुराना से लेकर खेतान तक

0
188

विंध्यवासिनी त्रिपाठी

नई दिल्ली। इसे संयोग कहें या अंधविश्वास मर्जी आपकी,लेकिन तमाम प्रगतिशील दावों के बावजूद आप नेता आशीष खेतान भी अपना वादा पूरा नहीं कर पाए। शामनाथ मार्ग स्थित कथित भुतहे सरकारी आवास में उनका भी कार्यकाल अधूरा रह गया।
हम बात कर रहें हैं दिल्ली के सिविल लाइंस स्थित 33, शामनाथ मार्ग के सरकारी आवास का जो 1993 में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री मदनलाल खुराना को आवंटित हुआ था। लोकप्रियता के शिखर और रसूख के बावजूद हवाला डायरी में नाम आने के बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद के साथ बंगला भी छोड़ना पड़ा। इसके बाद तत्कालीन भाजपा सरकार के पूरे कार्यकाल तक यह बंगला यू्ॅ ही खाली रहा। फिर शीला दीक्षित की सरकार आई और बंगला उन्हें आवंटित हुआ लेकिन वे भी इसमें रहने को राजी नहीं हुईं मथुरा रोड स्थित अपेक्षा़कृत छोटे से बंगले में चली गईं। तब बंगला बतौर मंत्री दीपचंद्र बंधु को मिला और वे यहीं रहते स्वर्गवासी हो गए। फिर तो 2003 से 2013 तक कोई इस आवास में आने को तैयार ही नहीं हुआ। आखिर 2013 में दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव शक्ति सिन्हा ने इस बंगलें में रहने का साहस दिखाया। लेकिन वे भी कार्यकाल पूरा करने से पहले स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति के लिए मजबूर हो गए। सिनहा के बाद बंगला फिर काफी समय खाली रहा। आखिकार दिल्ली डॉयलाग कमीशन के उपाध्यक्ष के हैसियत से आशीष खेतान ने यह कहते हुए इस बंगले मे प्रवेश लिया कि वे इस कथित भुतहे बंगले को लेकर फैली मिथ्या धारणा को खत्म कर देंगे। लेकिन ये क्या वे भी बीच रास्ते इसे खाली करने को मजबूर हो गए।
वजह चाहे जो भी लेकिन कथित भुतहे बंगले का भय तो अभी आगे भी लोगों को परेशान करता रहेगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here