सावधानः अब निपाह वायरस बना जान का दुश्मन

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chandra bhushan tiwari
नई दिल्ली। जैसे-जैसे मेडिकल साइंस का विकास हो रहा है वैसे-वैसे नई बीमारियां और नए वायरस भी सामने आ रहे हैं। अब निपाह नामक रहस्यमयी वायरस लोगों की जान का खतरा बना हुआ है। हाल ही में इस वायरस की चपेट में आकर केरल के कोझीकोड शहर में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। एक अंग्रेजी अखबार के मुंताबिक तीनों की मौत के 12 घंटे के भीतर कोझिकोड और मलप्पुरम में इन्हीं लक्षणों के साथ आठ और लोगों की मौत की ख़बर आई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़ निपाह वायरस तेज़ी से उभरता वायरस है, जो जानवरों और इंसानों में गंभीर बीमारी को जन्म देता है। इसके बारे में सबसे पहले 1998 में मलेशिया के कम्पंग सुंगाई निपाह से पता चला था.। उसके बाद इस वायरस को निपाह नाम मिला। सन 2004 में बांग्लादेश में कुछ लोग इस वायरस की चपेट में आए।इन लोगों ने खजूर के पेड़ से निकलने वाले तरल को चखा था और इस तरल तक वायरस को लेने जानी वाली चमगादड़ थीं। इसके अलावा इस वायरस के एक इंसान से दूसरे इंसान तक पहुंचने की पुष्टि भी हुई है। इंसानों में इस वायरस के इंफ़ेक्शन से सांस लेने से जुड़ी गंभीर बीमारी हो सकती है या फिर जानलेवा इंसेफ़्लाइटिस भी अपनी चपेट में ले सकता है। सेंटर फ़ॉर डिजीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक निपाह वायरस का इंफ़ेक्शन एंसेफ़्लाइटिस से जुड़ा है, जिसमें दिमाग़ को नुक़सान होता है। 5 से 14 दिन तक इसकी चपेट में आने के बाद ये वायरस तीन से 14 दिन तक तेज़ बुख़ार और सिरदर्द की वजह बन सकता है। ये लक्षण 24-48 घंटों में मरीज़ को कोमा में पहुंचा सकते हैं। इंफ़ेक्शन के शुरुआती दौर में सांस लेने में समस्या होती है जबकि आधे मरीज़ों में न्यूरोलॉजिकल दिक्कतें भी होती हैं। साल 1998-99 में जब ये बीमारी पहली बार प्रकाश में आई थी तो इस वायरस की चपेट में 265 लोग आए थे। मलेशिया और सिंगापुर में इसके सूअरों के ज़रिए फैलने की जानकारी मिली थी जबकि भारत और बांग्लादेश में इंसान से इंसान का संपर्क होने पर इसकी चपेट में आने का ख़तरा ज़्यादा रहता है.

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