लोलार्क कुण्ड में लाखों दम्पतियों ने लगायी आस्था की डुबकी

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वाराणसी। संतान (पुत्र) की चाह में लोलार्क छठ पर्व पर शनिवार को लाखों दम्पतियों ने एक साथ भदैनी स्थित संकरे लोलार्क कुण्ड में आस्था की डुबकी लगायी।
कुंड में डुबकी लगाने के बाद श्रद्धालुओं ने अपने गीले वस्त्र और आभूषण कुंड में ही छोड़ दिये। नुकीली सुईयों से बिंधे हुए फल भगवान सूर्य को चढ़ा सन्तान प्राप्ति के लिए उनसे गुहार लगायी।
इसके पूर्व कुण्ड में स्नान के लिए दम्पति आधी रात से ही लगभग दो किमी से भी अधिक लम्बी लाइन में कतारबद्ध होकर स्नान के लिए अपनी बारी का इन्तजार कर रहे थे। भीषण धूप उमस के बीच आस्था इस कदर हिलोरे मार रही थी कि कतार मदनपुरा तक लग गयी थी। उधर हजारों श्रद्धालुओं ने बीते शुक्रवार की शाम ही अस्सी से लोलार्क कुंड और उधर शिवाला से भदैनी तक की गयी बेरिकेडिंग में चादरें बिछा कर अपनी-अपनी जगह छेक ली थी। इस दौरान फल-फूल पूजन सामग्री, भतुआ, श्रीफल, कदंब के फल साथ ही बनावटी पायल बिछियां नाक की कील और नथुनी जैसे जेवरों की सजी अस्थायी दुकानों और भीड़ की रजगज से समूचे क्षेत्र में जबरदस्त रौनक छा गयी। मेला क्षेत्र से जुड़ने वाली सड़कों पर जिला प्रशासन ने यातायात प्रतिबंधित कर दिया था। मेला क्षेत्र में सड़क की दुर्दशा और गंदगी के चलते श्रद्धालु काफी साँसत में रहे। उधर रविन्द्रपुरी स्थित अघोराचार्य बाबा कीनाराम की तप स्थली ‘क्रीं कुण्ड’ में भी निसंतान दम्पतियों ने सन्तान प्राप्ति के लिए डुबकी लगायी। यहां मध्यप्रदेश, बिहार,उत्तराखण्ड से भी श्रद्धालु स्नान के लिए आये थे।
मान्यता है की इस विशेष अवसर पर क्रीं कुंड मे स्नान से पुत्र प्राप्ति की बाधा तो दूर होती ही है। असाध्य चर्म रोगों से भी मुक्ति मिलती है। यहां आश्रम में बीते शुक्रवार की दोपहर से ही श्रद्धालु आने लगे थे।
गौरतलब हो कि लोलार्क कुण्ड में भाद्रपद के शुक्लपक्ष की षष्ठी तिथि को लेकर पौराणिक मान्यता है कि कुंड में सूर्य की पहली किरण के साथ स्नान करने से सभी मनोकामना पूरी होती है।
मान्यता है कि देवासुर संग्राम के समय भगवान सूर्य के रथ का पहिया इसी स्थान पर गिरा था। इससे ही कुंड का निर्माण हुआ था। इसी स्थान पर लोलार्क नाम के असुर का भगवान सूर्य ने वध किया था। यह भी कहा जाता है कि महाभारत काल में कुंती को सूर्य उपासना से ही दानवीर कर्ण जैसे पुत्र की प्राप्ति हुई थी। इस कुण्ड का जीर्णोद्धार महारानी अहिल्या बाई होलकर,अमृत राव और कूंच विहार स्टेट के महाराज ने बनवाया था। लोलार्क कुंड का वर्णन गहरवाल के ताम्रपत्रों, महाभारत, स्कंदपुराण के काशी खंड में, शिव रहस्य, सूर्य पुराण और काशी दर्शन में विस्तार से किया गया है।
एजेंसी

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