रेलवे की संपत्तियों पर होगी सेटेलाइट की पैनी नजर

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भानु प्रताप सिंह
नई दिल्ली। रेलवे की जमीनों और स्टेशनों के आसपास कब्जा रोकने के लिए विभाग अपनी संपत्तियों की निगरानी सेटेलाइट के जरिए करेगा। इसके लिए रेलवे और इसरो के बीच समझौता पत्र पर हस्ताक्षर भी हो चुके हैं। इसे अंतिम रूप देने के लिए रेलवे को डाटा संकल्प तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत झांसी मंडल भी अपनी संपत्तियों का ब्यौरा तैयार करने में जुट गया है।
अब आसमान से रेलवे की संपति और यात्रियों की सुरक्षा की जाएगी। सेटेलाइट के जरिए रेलवे की संपति और स्टेशन के इर्द-गिर्द अतिक्रमण करने वालों पर भी पैनी नजर रखी जाएगी। इसके लिए रेलवे और इसरो के बीच करार हुआ है। इसके बाद से सभी रेल मंडलों से अपनी अपनी संपति का ब्यौरा जुटाने को कहा गया है। झांसी मंडल की संपत्तियों का डाटा तैयार किया जाने लगा है। मंडल में भी कंट्रोल रूम स्थापित किए जाएंगे। जहां से मुख्य कंट्रोल रूम को संपति की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके बाद मैपिंग के जरिए सेटेलाइट से चिंहित स्थानों को फीड किया जाएगा। इसके बाद रेलवे की सभी संपतियों पर आसानी से नजर रखी जाएगी। अफसरों के मुताबिक, रेलवे की सभी संपत्तियो का खाका तैयार किए जाने के बाद जीआईएस पोर्टल विकसित किया जाएगा। यह पूरी तरह से जीपीएस प्रणाली पर आधारित होगा। इसका कार्य तेजी के साथ चल रहा है। प्रगति के लिहाज से कार्य इस साल दिसम्बर तक पूरा होने की संभावना है।
ट्रैकों के काम भी ऑनलाइन दिखेंगे। इससे सेंट्रल रेलवे को यह भी जानकारी मिलेगी कि कहां निर्माण या मरम्मत का काम चल रहा है। रेलवे के मुताबिक पूरी तैयारियों के बाद ही इसरो ने समझौता किया है। मानव निर्मित सेटेलाइट एक छोटी से टीवी के आकार के बराबर होता है। इसके दोनों तरफ सोलर पैनल होता है, वहीं से इनको बिजली मिलती है। वही इनके बीच मे ट्रांसमीटर और रिसीवर होते है जो सिग्नल को रिसीव व नजर का काम करते है। इसके अलावा कुछ कंट्रोल मीटर भी होते है जिनकी मदद से सैटेलाइट को रिमोटली कंट्रोल कर सकते है।
भारतीय रेलवे ने संपत्तियो की निगरानी तंत्र को मजबूत करने के लिए दिशा निर्देश दिए हैं। बताए गए मैपिंग के हिसाब से सेटेलाइट मे चिन्हित स्थान अपलोड होगा। जिससे 24 घंटे उन पर नजर रखी जाएगी। इसमें रेलवे स्टेशन भी शामिल है। इसके अलावा ट्रेनों पर भी सिग्नल उपकरणों की खामी को पकड़ा जा सकेगा। इससे रेलवे संपति की पूरी तरह निगरानी हो सकेगी। सेटेलाइट के जरिए संपत्तियों पर नजर रखी जाएगी। मंडल में सभी संपत्तियों का डाटा तैयार किया जा रहा है।

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