दसवीं में दो विषयों में हो गए थे फेल, फिल्मों में कर रहे टॉप

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chandra bhushan tiwari
नई दिल्ली। प्रतिस्पर्धा की दौड़ में परीक्षा में फेल होने पर अधिकांश बच्चे निराश हो जाते हैं। उन्हें अपना भविष्य अंधकारमय प्रतीत होने लगता है। कभी-कभी तो कुछ बच्चे आत्मघाती कदम भी उठा लेते हैं। लेकिन फेल होने से जिंदगी असफल नहीं हो जाती। इसे साबित कर दिखाया है। ’सैराट’ जैसी फिल्म से देशभर में मशहूर हुए नागराज मंजुले ने। दसवीं की परीक्षा में वे दो विषय गणित व अंग्रेजी में फेल हो गए थे। अंग्रेज़ी में तो सिर्फ 6 नंबर मिले थे। अपने दोस्तों के बीच वे दसवीं में फेल होने वाले अकेले थे। उनका मानना है कि अगर वे फेल न होते तो शायद इतना मशहूर न हो पाते। वे भी अपने दूसरे साथियों की तरह प्रोफेशनल कोर्स कर कोई नौकरी कर रहे होते। लेकिन दसवीं में फेल होना उनके करियर के लिए टर्निंग प्वॉइंट साबित हुआ। इसके बाद उन्हें सोचने समझने और पढ़ने का मौका मिला। करियर के दूसरे विकल्पों के बारे में चिंतन किया। नागराज को न तो गणित में रुचि थी और न ही अंग्रेजी में। इसीलिए उन्हें फेल होने पर बहुत आश्चर्य नहीं हुआ। हालांकि एक से बढ़कर एक मराठी फिल्मों का निर्देशन करने वाले नागराज को मराठी विषय में भी 100 में से मात्र 42 नंबर मिले थे। गणित में तो 150 में से मात्र 32 अंक मिले थे। दसवीं में फेल होने पर पड़ोंसी और रिश्तेदार भी नागराज को हतोत्साहित करने लगे। वे सबे कहने लगे कि जीवन में अब तेरा कुछ नहीं हो सकता। हालांकि उनके पिता ने नागराज का साथ दिया। उन्होंने प्रोत्साहित करते हुए कहा कि दसवीं की परीक्षा जीवन का अंत नहीं है। तुम अपने जीवन में जरूर कामयाबी हासिल करोगे। पिता का साथ और प्रोत्साहन नागराज के लिए संजीवनी साबित हुआ। उन्होंने फिल्म निर्देशन को करियर बनाया और सपफलता की सीढ़ियां चढीं। नागराज का कहना है कि असफलता सफलता की पहली सीढ़ी है। इसलिए बच्चों को असफलता से नहीं
घबराना चाहिए। अपना लक्ष्य तय कर पूरी क्षमता से आगे बढ़ना चाहिए।

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