ट्रेन में नही मिलेगा 2 अक्टूबर को ‘नॉन वेज’ खाना

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दिल्ली/राजेश कुमार

अगर सब कुछ ठीक-ठाक रहा या यूं कहे रेलवे की ओर से तैयार प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है तो दो अक्टूबर को रेलवे परिसरों और ट्रेन में यात्रियों को मांसाहा भोजन नही परोसा जाएगा।रेलवे के एक प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है तो दो अक्तूबर को देश में ना सिर्फ राष्ट्रीय स्वच्छता दिवस मनाया जाएगा बल्कि शाकाहार के सबसे मशहूर पैरोकार रहे महात्मा गांधी के सम्मान में उनकी जयंती को ‘शाकाहार दिवस’ के रूप में भी मनाया जाने पर फैसला लिया जा सकता है।

शाकाहार दिवस पर मोहर लग सकता है

दो अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की जयंती मनाई जाती है और केंद्र सरकार की ओर से इसी दिन स्वछत भारत अभियान की शुरुवात की गई थी। अब सरकार की गाँधी जयंती के दिन एक और योजना बनाई जा रही है। सूत्र की माने तो अब दो अक्टूबर को शाकाहार दिवस मनाने की योजना बनाई जा रही है।रेलवे बोर्ड की ओर से तैयार किए गए एक प्रारूप के मुताबिक रेलवे ने एक प्रस्ताव पेश किया है।जिसमें दो अक्तूबर 2018, 2019 और 2020 को रेलवे परिसरों और ट्रेनों में यात्रियों को मांसाहार खाना नहीं परोसा जाएगा। केंद्र सरकार ने 2020 में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर विशेष समारोह मनाने की योजना बनाई है।रेलवे ने ‘शाकाहार दिवस’ मनाए जाने के अलावा साबरमती से गांधीजी से जुड़े विभिन्न स्टेशनों के लिए ‘स्वच्छता एक्सप्रेस और डांडी मार्च के उपलक्ष्य में 12 मार्च को साबरमती से एक ‘विशेष नमक रेल’ चलाने की योजना बनाई है।रेलवे ने महात्मा गांधी की वाटरमार्क तस्वीर के साथ टिकटें भी जारी करने की योजना बनायी है। रेलवे बोर्ड के मुताबिक, इसके लिए संस्कृति मंत्रालय से मंजूरी की जरूरत पड़ेगी क्योंकि यह विशेष स्मारक जारी करने वाली नोडल मंत्रालय है।

लक्ष्य शौंच मुक्त इंडिया

दरअसल,इस महीने की शुरुआत में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती समारोह की तैयारियों को लेकर ‘राष्ट्रीय समिति’ की पहली बैठक की अध्यक्षता की थी।आपको याद होगा कि 2 अक्टूबर 2014 को केंद्र सरकार की ओर से स्वच्छ भारत अभियान आरंभ किया गया था जिसका उद्देश्य गलियों, सड़कों तथा अधोसंरचना को साफ-सुथरा करना है। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने देश को गुलामी से मुक्त कराया, परन्तु ‘स्वच्छ भारत’ का उनका सपना पूरा नहीं हुआ। महात्मा गांधी ने अपने आसपास के लोगों को स्वच्छता बनाए रखने संबंधी शिक्षा प्रदान कर राष्ट्र को एक उत्कृष्ट संदेश दिया था। स्वच्छ भारत का उद्देश्य व्यक्ति, क्लस्टर और सामुदायिक शौचालयों के निर्माण के माध्यम से खुले में शौच की समस्या को कम करना या समाप्त करना है।हालांकि मोदी सरकार ने 2 अक्टूबर 2019, महात्मा गांधी के जन्म की 150 वीं वर्षगांठ तक ग्रामीण भारत में 1 करोड़ 96 लाख रुपये की अनुमानित लागत के 1करोड़ 2लाख शौचालयों का निर्माण करके खुले में शौंच मुक्त इंडिया को हासिल करने का लक्ष्य रखा है।

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