विश्वविद्यालय में हंगामा कर रहे फेल छात्रों पर लाठीचार्ज

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कानपुर। लापरवाही से उत्तर पुस्तिका जांचने का आरोप लगाते हुए छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय में सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने सोमवार को हंगामा किया। छात्रों ने जीटी रोड पर जाम लगा दिया। इसके बाद कई थानों की फोर्स मौके पर पहुंची और छात्रों पर जमकर लाठियां भाजीं, जिससे कई दर्जन छात्र-छात्राएं चोटिल हो गए। करीब एक दर्जन गंभीर रूप से घायल छात्रों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है और जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जायेगी।
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय ने करीब 10 दिन पहले बीएससी का परीक्षा परिणाम घोषित किया है। परिणाम का प्रतिशत बहुत कम होने पर ज्यादातर छात्र व छात्रायें फेल हो गये। इस परिणाम में बीएससी द्वितीय वर्ष की स्थिति और खराब रही, कुछ छात्रों को कई विषयों शून्य अंक तक मिले। जिसको लेकर छात्रों ने उत्तर पुस्तिकाओं का दोबारा मूल्यांकन करवाने को लेकर मांग की। लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों की मांग पर कोई विचार नहीं किया। जिसके चलते सोमवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के बैनर तले करीब चार सौ फेल छात्र-छात्रायें विश्वविद्यालय में विरोध प्रदर्शन करने लगे। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई भी जिम्मेदार छात्रों से वार्ता करने नहीं पहुंचा। जिसके बाद छात्र उग्र हो गये और जीटी रोड को जाम कर जमकर विश्वविद्यालय के गेट हंगामा करने लगे और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
जीटी रोड जाम होने की सूचना पर पहुंची कई थानों की पुलिस ने छात्र व छात्राओं को समझाने का प्रयास किया, लेकिन छात्र विश्वविद्यालय के अधिकारियों को मौके पर बुलाने के लिये अड़ गये। मामला बढ़ता देख पुलिस ने जमकर लाठियां भाजीं तो छात्रों ने भी पथराव कर दिया। जिससे कई दर्जन छात्र व छात्रायें चोटिल हो गये और करीब एक दर्जन छात्रों को अधिक चोट लगने पर पुलिस ने हैलट अस्पताल में भर्ती कराया। छात्रों का कहना है कि बीएससी की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन सही ढंग से नहीं किया गया, इसलिए दोबरा मूल्यांकन होना चाहिये।
अखिल भारतीय विद्याथी परिषद के छात्र नेता आशुतोष ने बताया कि विश्विद्यालय प्रशासन ने पहले तो मूल्यांकन ठीक से नहीं किया। अब उनका कहना है कि छात्रों के पास चैलेंज करने का अधिकार है। लेकिन इसमें सबसे बड़ी समस्या है कि चैलेंज करने की फीस तीन हजार रुपए हैं। ऐसे में एक आम छात्र इतने पैसे कहां से लाएगा। यह गड़बड़ी विश्वविद्यालय की ओर से हुई है और विश्वविद्यालय को ही उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन कराना चहिए।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. संजय स्वर्णकार ने बताया कि सोमवार को विश्वविद्यालय में परीक्षायें चल रहीं थी। जिसके कारण नारेबाजी कर रहे छात्रों को पुलिस ने गेट के बाहर ही रोकने का प्रयास किया और इस पर छात्रों ने पथराव कर दिया। कहा कि छात्रों के आरोपों को गंभीरता से लिया गया है और पूरे मामले को लेकर चार सदस्यीय जांच कमेटी का गठित कर दी गयी है। जांच कमेटी एक सप्ताह के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। यदि विश्वविद्यालय की ओर से मूल्यांकन में गड़बड़ी हुई होगी तो उसमें सुधार किया जायेगा।
पुलिस अधीक्षक पश्चिमी संजीव सुमन ने बताया कि पुलिस ने एबीवीपी के नेता अभिषेक सहित एक दर्जन से अधिक छात्र छात्राओं को हिरासत में लिया है। भारी पुलिस बल मौके पर मौजूद है। विश्वविद्यालय में चल रहीं परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं पंहुचेगी। पुलिस द्वारा की गई लाठीचार्ज पर कहा कि पुलिस ने लाठीचार्ज नहीं किया है छात्रों को भगाने के लिये जमीन लाठी पटकी गयी हैं। आरोप लगाया कि छात्रों के इस आंदोलन विद्यार्थी परिषद ने राजनीतिक रंग देने की कोशिश की है।
एजेंसी

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