आरबीआइ की डेडलाइन खत्म, 70 कंपनियों पर होगी कार्रवाई

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मुंबई। कर्ज में डूबी करीब 70 बड़ी कंपनियों के खिलाफ दिवालिया कार्रवाई शुरू होगी। इन कंपनियों पर सरकारी व निजी बैंकों का करीब 4 लाख करोड़ रुपये का कर्ज फंसा हुआ है। आरबीआइ के सख्त निर्देशों के बाद कर्जदाता बैंक अब डिफॉल्टर कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए मामले को एनसीएलटी में लेकर जा सकते हैं। फिलहाल पावर सेक्टर की कंपनियों को भी एनपीए मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। एनपीए की समस्या से निपटने के लिए आरबीआइ ने 6 महीने का वक्त दिया था, जो 27 अगस्त को समाप्त हो गया। बता दें कि मार्च 2015 से मार्च 2018 के दौरान बैंकों का नॉन परफॉर्मिंग एसेट (एनपीए) में 6.2 लाख करोड़ रुपये की बढ़त हुई है। समिति की एक ड्राफ्ट रिपोर्ट के अनुसार इसकी वजह से बैंकों को 5.1 लाख करोड़ रुपये तक की प्रोविजनिंग करनी पड़ी है।

ज्ञात रहे कि अवंता झाबुआ पावर, कोस्टल एनर्जन, जेपीवीएल, एसकेएस पावर, जीएमआर राजामुंद्री, जीएमआर छत्तीसगढ़, बल्लारपुर इंडस्ट्रीज, सुप्रीम इंफ्रा, मैटिक्स फर्टिलाइजर, बॉम्बे रेयॉन, हिंदुस्तान नेशनल ग्लास और सूरत हजीरा की ओर से कर्ज भुगतान से संबंधित मामला अब एनसीएलटी के बाहर सुलझाने की कोशिश हो रही है। हालांकि अदानी पावर महाराष्ट्र, आधुनिक पावर, दामोदर वैली, डीबी पावर, जीएमआर कामलंगा, कांति बिजली और जीवीके इंडस्ट्रीज जैसी पावर कंपनियों ने अपने मामले को सुलझा लिया गया है।

जिंदल इंडिया थर्मल पावर, रतन इंडिया, लवासा कॉर्प, एस्सार पावर गुजरात और सिमपुरी एनर्जी का मामले की सुनवाई फ़िलहाल एनसीएलटी में चल रही है।

इसके अलावा रोहित फेरोटेक, जेबीएफ इंडस्ट्रीज, गार्डन सिल्क मिल्स, आइएसएमटी, गीतांजलि जेम्स, स्पेनडिड मेटल और बीएमएम इस्पात का मामला भी एनसीएलटी में जाने की उम्मीद है। हालांकि रिलायंस कम्युनिकेशंस ने अपने मामले को एनसीएलएटी में चुनौती दी है, जिसकी सुनवाई प्रलंबित है। इसके कारण कर्जदाता बैंक इस मामले को दोबारा एनसीएलटी में नहीं भेज सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक बिजली निर्माण करनेवाली कई पॉवर कंपनियों पर बकाये एनपीए का मामला आगामी दो सप्ताह के भीतर सुलझने की उम्मीद है। एनपीए सुलझाने के लिए बैंकों के पास 15 दिनों का समय है। बताया जा रहा है कि बिजली कंपनियों के एनपीए मामले पर ऊर्जा मंत्री जल्द बैठक बुला सकते हैं।
एजेंसी

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